दोहरी ज़िन्दगी . . . क्यों ?
आज हर इंसान दोहरी ज़िन्दगी जी रहा है, आखिर क्यों ? इस प्रश्न का कोई सटीक जवाब किसी के पास भी नहीं है । लेकिन हर इंसान की जरुरत हो गयी है ... दोहरी ज़िन्दगी ।
शायद आज का सामाजिक रहन सहन, आधुनिकता और इंसान की दिमागी सोच का नतीजा है दोहरी ज़िन्दगी । आखिर इंसान करे भी तो क्या... अगर दोहरी ज़िन्दगी नहीं जियेगा तो शायद अपनी ज़िन्दगी भी नहीं जी पायेगा क्योकि आज अगर आप अपने जीवन की हर सच्चाई यू ही बयान करते चले तो समझो जीना मुश्किल. . . इसलिए नहीं की आपकी सच्चाई पर शक है, बल्कि आज आपकी सच्चाई को समझाने वाले नहीं हैं ।
लोगो को जितने आशानी से झूठ पर यकीन हो जाता है सच्चाई उतने ही यकीन से झूठी नजर आती है । इसलिए आज हर इंसान की मजबूरी हो गयी है दोहरी ज़िन्दगी जीना ।
ऑफिस से ले कर घर तक दिन भर इंसान झूठ के सहारे जी रहा है असल में जो हमे झूठ लगता है वो झूठ होता नहीं है । बल्कि वो एक ऐसी सच्चाई होती है जिसके बिना कोई भी इस दुनिया में एक पल भी सुकून से नहीं रह सकता । अगर घर पर आते ही आपके सहकर्मी का किसी आवश्यक कार्य के लिए फोन आ जाता है तो आप की पत्नी आपसे सैकड़ो सवाल कर बैठती है । किसका फोन था, क्यों आया था, क्या काम था. . .
इन सारे सवालों की डर के मारे, आप सच बोलना मुनासिब नहीं समझते और बड़े प्यार से एक प्यारा सा झूठ बोल देते है , पता नहीं नंबर से था ।
इसी प्रकार बहुत से उदाहरण हैं , जो आपकी ज़िन्दगी में रोज घटित होते हैं और आप मज़बूरी में दोहरी ज़िन्दगी जीने पर मजबूर हो जाते हैं । और इसमें कुछ भी गलत नहीं है अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो शायद अपना सबकुछ खो देंगे । पर ज़िन्दगी की खुशियों के लिए तो ठीक है लेकिन अगर आप इस विकल्प का उपयोग किसी नाजायज काम के लिए करते हैं तो भी आप अपना सब कुछ खो देंगे ।
इसलिए हमें अपने जीवन में अपने जीने के तरीके का चुनाव स्वयं करना चाहिए ।
3 comments:
very nice...
realy true...
e to har insaan ki sachhai hai............
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