Monday, January 9, 2012

" पल भर की ख़ुशी "

ख़ुशी एक ऐसा एहसास है.....जो पल भर के लिए ही हमारे पास आती है, पर उस पल भर में ही हमारे मन को आनंद की उस गहराई तक ले जाती  है जहाँ से हमें अपने जीवन की उन तमाम सुखद घटनाओं की अनुभूति होती है जिसे हम या तो पहले जी चुके होते हैं या तो जीने की कल्पना रखते हैं. 
            कुछ वक़्त के लिए हम ये भूल जाते हैं कि हम वही हैं जो अभी अभी कितने दुखो से हो के गुजरे हैं... और होना भी ऐसा ही चाहिए कि जो दुख आये उसे हँसते हुए झेलना  अपनी आदत बना लेना ही जीवन जीने का सबसे अच्छा और आराम दायक तरीका है. 
              अगर हम इस तरह से हर पल खुद को कमजोर करते जायेंगे तो हम अपनी ज़िन्दगी को खो देंगे, क्योंकि ज़िन्दगी में ख़ुशी कम और ग़म ज्यादा हैं. 
              खुशियों का क्या आती हैं जाती हैं पर हम हर पल बदलती दुनिया कि इन तमाम मुश्किलों को अपने दामन में समेट के जीने के लिए ही इस धरती पर आये हैं. हमारे लिए तो पल भर कि ही ख़ुशी ही काफी है. पर कभी कभी बहुत कष्ट होता है जब हमे पल भर कि खुसी मिलनी शुरू हो और तुरंत फिर से एक नए दुखों का पहाड़ टूट पड़े, पर हम कर भी क्या सकते हैं.............सुख दुःख का संगम ही तो जीवन है. 
इन दुखो के बीच में मुस्कराना  ही ज़िन्दगी है. आज के इस वातावरण में दुखो के बीच में खुश रहना ही जीने कि कला है. और इस कला को हम सब को अपने सुखमय जीवन के लिए सीख लेना ही आवश्यक है.

3 comments:

Anonymous said...

nice

Anonymous said...

its realy true of life

Anonymous said...

exactly yahi hota hai......