Sunday, January 29, 2012

"सूक्ति संसार"

  • सच्चा गुरु तो उन्नत निष्ठा और अपना विवेक ही है।

  • परिवर्तन से डरना और संघर्स से कतराना मनुष्य की बहुत बड़ी कायरता है।

  • प्रसादपूर्ण जीवन संसार की साड़ी बुराईयों और व्यसनों का जन्मदाता है।

  • सदुदेश्य की सफलता के लिए दृढ निश्चय का होना परमावश्यक है।

  • हम जहाँ रह रहे हैं, उसे नहीं बदल सकते, पर अपने आप को बदल कर हर स्थिति का आनंद ले सकते हैं।

  • पुस्तकों का संकलन ही आज का वास्तविक विद्यालय है।

  • पुस्तकें मन के लिए साबुन का काम करती हैं।

  • स्वार्थ उतना ही उचित है, जिससे दुषरों की भावनाओं, आवश्यकताओं और अधिकारों का हनन न हो।

2 comments:

Anonymous said...

its very nice...

Rahul said...

in baaton ka sabko apne jiwan me palan karna chahiye,.