"सूक्ति संसार"
- सच्चा गुरु तो उन्नत निष्ठा और अपना विवेक ही है।
- परिवर्तन से डरना और संघर्स से कतराना मनुष्य की बहुत बड़ी कायरता है।
- प्रसादपूर्ण जीवन संसार की साड़ी बुराईयों और व्यसनों का जन्मदाता है।
- सदुदेश्य की सफलता के लिए दृढ निश्चय का होना परमावश्यक है।
- हम जहाँ रह रहे हैं, उसे नहीं बदल सकते, पर अपने आप को बदल कर हर स्थिति का आनंद ले सकते हैं।
- पुस्तकों का संकलन ही आज का वास्तविक विद्यालय है।
- पुस्तकें मन के लिए साबुन का काम करती हैं।
- स्वार्थ उतना ही उचित है, जिससे दुषरों की भावनाओं, आवश्यकताओं और अधिकारों का हनन न हो।
2 comments:
its very nice...
in baaton ka sabko apne jiwan me palan karna chahiye,.
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