Sunday, March 11, 2012

"एक रिश्ते की तलाश "

रिश्ते अनमोल होते हैं, इन्हें टूटने से बचाना पड़ता है, पर रिश्ते तो शीशे के घरोंदों की तरह होते हैं, जो सिर्फ टूटने के लिए ही बने होते हैं, फिर भी रिश्ते अपने होते हैं। क्योंकि रिश्तों के एहसास मात्र से ही दुखों के पहाड़ ऐसे छट जाते हैं, जैसे बारिश के बाद बादल। पर मुझे क्या पता मेरे साथ तो न माँ की ममता, न पिता का साया, न भाई- बहन का प्यार, किसी रिश्ते की डोर तो नहीं है मेरे हाथ में, जिसके सहारे मै भी इस निर्दयी दुनिया में सर उठा के जी सकूँ, अपनापन महसूस कर सकूँ। महिमा इसी उधेड़-बुन में रात-दिन लगी रहती! वह इतनी खोई-खोई रहती की कभी-कभी उसे लगता जैसे उसका कोई अस्तित्व ही ना हो, एक दिन उसने तय किया कि जिस अकेलेपन कि इमारत में वह रात-दिन घुट रही है, उससे बाहर निकलेगी, और अपने लिए एक माँ, एक पिता, एक भाई, एक बहन खोजेगी...? 
पर कितनी नादान है वो उसे ये नहीं पता कि माँ, पिता, बहन, भाई खोजने से नहीं मिलते...?
       फिर भी वो अपनी आँखों में उम्मीद कि किरण लिए प्यासे हिरन कि तरह रेगिस्तान में चारो तरफ एक बूंद पानी कि तलाश में ऐसे दौड़ाने लगी जैसे आज सच में उसकी बरसों कि प्यास बुझ जाएगी, उसे आज जरुर एक भाई या बहन या पिता नहीं तो माँ जरुर मिल जाएगी, पर ये क्या महिमा अचानक रुक क्यों गयी...?
      क्या सोचने लगी, क्यों जम गयी पत्थर की तरह, क्यों आँखे भर आई उसकी?
      शायद उसे अपने बचपन के वो दिन याद आ गये, जब वह बहुत छोटी थी... अनाथ थी... नादान थी... न समझ थी ?
     अपने घर के आस-पास खेला करती थी, और अपनी कालोनी के लोगों में सारे रिश्ते देखा करती थी, और बहुत खुश रहती थी। पर एक दिन अचानक उसी कालोनी के लड़के जिनको वो भैया कहा करती थी। जब वही लड़के उसकी इज्ज़त बचाने के बजाय लूटने कि कोशिश करने लगे....  तो कोई माँ, कोई बहन, कोई पिता उसे बचाने क्यों नहीं आया।
फिर आज ऐसे बदनाम रिश्तों कि तलाश में क्यों जा रही हूँ ....
मुझे नहीं चाहिए... ऐसे रिश्ते जो रिश्तों कि मर्यादा ही न समझे....
नहीं....
मुझे किसी रिश्ते कि कोई जरुरत नहीं है...
मै अकेले ही खुश रह लूँगी...  
मै अकेले ही खुश रह लूँगी......
मै अकेले ही खुश रह लूँगी.........

1 comment:

Puja said...

Bahut achhi kahani hai...